“जिस तरह से एक नदी अपने बहाव से नवीन दिशाओं में भी अपनी राह बना लेती है, उसी तरह एक इंसान को भी मेहनत के बल पर नए क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश करनी चाहिए।”
परिवार से बड़ा कोई धन नहीं, पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं, माँ की छाँव से बड़ी कोई दुनिया नहीं, भाई से अच्छा कोई भागीदार नहीं, बहन से बड़ा कोई शुभ चिंतक नहीं, इसलिए “परिवार” से बड़ा कोई जीवन नहीं।
रिश्ता ऐसा हो जिस पर नाज़ हो, कल जितना भरोसा था उतना ही आज हो, रिश्ता सिर्फ वो नहीं जो ग़म या ख़ुशी में साथ दे, रिश्ते तो वो हैं जो हर पल अपनेपन का एहसास दें!